संपूर्ण ब्रह्मांड में जो कभी नहीं बदलता, सदैव एक जैसा रहता है?
🙏संपूर्ण ब्रह्मांड में जो कभी नहीं बदलता, सदैव एक जैसा रहता है... वो है: "सत्य"
और "चेतना"
🙏
भक्ति की भाषा में इसे हम 3 नाम से जानते हैं:
1. ब्रह्म /
परमात्मागीता में कृष्ण कहते हैं:
नासतो विद्यते भावः, नाभावो विद्यते सतः
"जो सत्य है उसका कभी नाश नहीं होता, और जो झूठ है वो कभी था ही नहीं" भगवान, वो शाश्वत चेतना, रूप बदलते हैं - कृष्ण, राम, शिव, देवी... लेकिन तत्व एक ही रहता है।
2. सत्य / दुनिया में सब कुछ बदलता है: सूरज उगता है, डूबता है, ऋतु आती है, जाती है शरीर बूढ़ा होता है, युग बदलते हैं - सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुगलेकिन सत्य? वो कल भी वही था, आज भी वही है, कल भी वही रहेगा।
3. प्रेम और करुणाभक्ति मार्ग में माना जाता है कि भगवान का सबसे बड़ा रूप ही प्रेम है।
माँ का प्यार, गुरु का आशीर्वाद, भक्त का समर्पण - ये कभी पुराने नहीं होते। विज्ञान की भाषा में: ब्रह्मांड के नियम - गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा संरक्षण। ये भी नहीं बदलते। इसीलिए हमारा ब्लॉग Bhakti Yog Sadhna भी इसी शाश्वत चीज़ को ढूंढता है - जो रूप में नहीं, भाव में है।
🌺आपको क्या लगता है? आपके मन में क्या जवाब आता है इसका? कमेंट बॉक्स में अपने सुझाव अवश्य लिखें।🌺

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें