About Us
🌺 हमारे बारे में 🌺
साथियों, आप सभी को मेरा स्नेहभरा प्रणाम। 🙏
मैं मुकेश योगभारती हूँ।
मेरा जीवन एक साधारण ग्रामीण परिवेश से प्रारंभ हुआ। बचपन गाँव की सादगी, संघर्ष, संस्कार और आत्मीयता के बीच बीता। उन दिनों मुझे यह आभास भी नहीं था कि माँ भगवती मेरे जीवन के लिए कैसी अद्भुत और दिव्य योजना तैयार कर रही हैं। समय के साथ जब-जब जीवन ने नए मोड़ लिए, तब-तब मैंने अनुभव किया कि ईश्वर की कृपा अदृश्य होकर भी हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन करती रहती है।
शिक्षा और अध्यापन की यात्रा
शिक्षा के प्रति मेरे मन में बचपन से ही विशेष अनुराग रहा। इसी प्रेरणा ने मुझे अध्यापन के क्षेत्र में आने का अवसर दिया। मैंने सरस्वती ज्ञान मंदिर जैसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था में अध्यापन किया तथा प्रयागराज के पूरेमियाँ, कौड़िहार और सहसों क्षेत्रों में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने का सौभाग्य प्राप्त किया। विद्यार्थियों के साथ बिताया गया प्रत्येक क्षण आज भी मेरे जीवन की अमूल्य धरोहर है। उनके बीच ज्ञान बाँटना मेरे लिए केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि एक साधना थी।
इसके पश्चात मैंने आर्य वैदिक शिक्षण संस्थान, आलमपुर की स्थापना की। यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय था, जहाँ शिक्षा के माध्यम से समाज की सेवा करने का अवसर मिला। मेरा विश्वास रहा है कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार है।
आध्यात्मिक सेवा का सौभाग्य
माँ भगवती की असीम कृपा से मुझे भगवती मानव कल्याण संगठन के केंद्रीय कार्यालय पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम के जनसंपर्क कार्यालय में केंद्रीय सहसचिव के रूप में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। लगभग सोलह वर्षों तक इस पावन दायित्व का निर्वहन करते हुए मुझे देश के अनेक क्षेत्रों में जाने, असंख्य लोगों से मिलने, उनके जीवन के अनुभव सुनने और आध्यात्मिक चेतना को निकट से समझने का अवसर मिला। इस अवधि ने मेरे व्यक्तित्व, विचारों और जीवन-दृष्टि को गहराई से समृद्ध किया।
वर्तमान जीवन
वर्तमान में मैं उत्तम पब्लिक स्कूल, योगेन्द्र विहार, कानपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हूँ। जीवन की प्रत्येक भूमिका ने मुझे कुछ नया सिखाया है और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
लेखन – मेरी आत्मिक अभिव्यक्ति
लेखन मेरी स्वाभाविक रुचि और आत्मिक अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। गीत, भजन, कहानियाँ और कविताएँ लिखना बचपन से ही मेरे स्वभाव का हिस्सा रहा है। मेरे अनेक लेख, भजन और रचनाएँ पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम से प्रकाशित होने वाली मासिक 'सिद्धाश्रम पत्रिका' में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। जब मेरी कोई रचना पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है, तो उसे मैं माँ भगवती की कृपा और प्रेरणा ही मानता हूँ।
जीवन के विभिन्न पड़ावों पर लोगों ने मुझे अलग-अलग नामों से पुकारा—किसी ने आचार्य जी, किसी ने बड़े सर, तो किसी ने स्नेहपूर्वक मुकेश भैया। आप सभी का यह प्रेम, विश्वास और सम्मान मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।
Bhakti Yog Sadhna – एक विनम्र आध्यात्मिक प्रयास
मेरे जीवन में अनेकों संघर्ष आए, सफलताएँ भी मिलीं, सम्मान भी मिला और कठिन परीक्षाओं का सामना भी करना पड़ा। किन्तु एक बात कभी नहीं बदली—माँ भगवती पर मेरा अटूट विश्वास।
इसी अटूट विश्वास और सेवा-भाव के साथ मैंने Bhakti Yog Sadhna की स्थापना की है। यह केवल एक ब्लॉग या डिजिटल मंच नहीं, बल्कि मेरी आध्यात्मिक साधना का एक विनम्र प्रयास है। यहाँ मैं अपने जीवन के अनुभव, आध्यात्मिक अनुभूतियाँ, प्रेरणादायक प्रसंग, सनातन धर्म से जुड़ी प्रामाणिक जानकारियाँ, मंत्र, आरती, चालीसा, व्रत कथाएँ, भजन, कहानियाँ तथा जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार आप सभी के साथ साझा करूँगा।
मेरा विश्वास है कि यदि मेरी लेखनी, मेरे अनुभव या मेरे द्वारा साझा की गई कोई भी बात किसी एक व्यक्ति के जीवन में भी आशा, श्रद्धा, आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन का दीप जला सके, तो मैं अपने इस प्रयास को सार्थक मानूँगा।
आपसे मेरा विनम्र निवेदन
आप सभी से मेरा करबद्ध निवेदन है कि इस आध्यात्मिक यात्रा में मेरे साथ जुड़े रहें। आपका स्नेह, विश्वास, सुझाव और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा और ऊर्जा है।
माँ भगवती की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे। आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का प्रकाश निरंतर फैलता रहे।

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