योग क्यों ज़रूरी है:
🌺 योग क्यों ज़रूरी है: एक संपूर्ण, प्रामाणिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण 🌺 आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहाँ मन निरंतर बाहर की दुनिया में भटक रहा है, वहीं 'योग' हमें अपने भीतर लौटने का मार्ग दिखाता है। "भक्ति योग साधना" के मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक साधक और साधारण व्यक्ति के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने और जीवन में पूर्ण संतुलन लाने का एक दिव्य माध्यम है। ✦─── 1. 'योग' का वास्तविक अर्थ क्या है? ───✦ 'योग' शब्द संस्कृत की 'युज' धातु से बना है, जिसका अर्थ है— जोड़ना, युक्त होना या एक होना। शारीरिक स्तर पर: शरीर, श्वास और मन का मिलन। आध्यात्मिक स्तर पर: जीवात्मा का परमात्मा से मिलन। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने योग की अति सुंदर परिभाषाएँ दी हैं: "योगः कर्मसु कौशलम्" (अध्याय 2, श्लोक 50) ➔ अर्थात: कार्यों में कुशलता ही योग है। "समत्वं योग उच्यते" (अध्याय 2, श्लोक 48) ➔ अर्थात: सुख-दुख, लाभ-हानि, और सफलता-विफलता में समभाव (संतुलन) बनाए रखना ही ...